सोमवार, 6 दिसंबर 2010
मंगलवार, 2 नवंबर 2010
BHAI organised Global Bhojpuri Movement's meeting at Guwahati
The Sunday Indian, Bhojpuri, Bhojpuri association of
and Global Bhojpuri Movement had a very important meeting at Guwahati on 22nd of Oct. 2010. The meeting was called to strengthen Global movement for the recognition of Bhojpuri language in the 8th schedule of Indian Constitution. Chief Guest was Mr. Onkareshwar Pandey, Executive Editor of The Sunday Indian, and Executive Director of Bhojpuri Association of India (BHAI).
The meeting held at the premises of Kendriya Hindi Sansthan, Guwahati. Apart from the Director of the Sansthan, there were many Bhojpuri Intellectuals, Rajbhasha Adhikari, Educationists, Journalists and Editors were also present. Shri Ratnesh Kumar was the convenor of the whole meeting. The participants included some of the representatives of Bhojpuri Organizations also.
A new Chapter of BHAI will be open to Guwahati. Shri Ratnesh Kumar, a senior Journalist, promised to take initiative for completion of the formalities and declared that he will dedicate himself for this cause.
बुधवार, 8 सितंबर 2010
गुरुवार, 15 जुलाई 2010
बुधवार, 7 अप्रैल 2010
कबीर भोजपुरी के पहिला कवि
ओंकारेश्वर पांडेय
भोजपुरिया लोग कबीर के आपन पहिला कवि मानेले. हालांकि उनका से पहिलहूं भोजपुरी में साहित्य रचल गइल, बाकिर ऊ छिटपुट रहे. नाथसिद्ध साहित्यो में छिटपुट रूप से भोजपुरी मिलेला, बाकिर कबीर साहित्य त पूरा तरह से भोजपुरी से भरल बा.
पिछला साल 7 जून के दिल्ली से छपे वाला एगो दैनिक अखबार में हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुडा के विज्ञापन छपल देखनीं. ई विज्ञापन कबीर जयंती पर रहे. विज्ञापन देख के मन में एक साथे दू गो विपरीत विचार उठल. पहिलका त ई कि एह बात के खुशी भइल कि चल कम से कम कवनो राज्य सरकार के याद त आइल कि कबीर नाम के कवनो अइसन संत साहित्यकारो रहन, जवन समाज के सुधार में आपन पूरा जिनगी गुजार देलन. दोसर ई कि दुनियाभर के भाईचारा के पाठ पढ़ावे वाला अइसन बड़ संत के भोजपुरिया क्षेत्र के नेता लोग भुला दीहल. ओह संत के जिनका के भोजपुरी के पहिला कवि मानल जाला. कबीर के याद ना त उत्तर प्रदेशे के सरकार के आइल अउर ना ही बिहारे सरकार के. एहिजा इहो बतावत उचित होई कि चलीं उत्तर प्रदेश सरकार रस्मीए तौर प सही बाकिर कम से कम उनकर जयंती प छुट्टी त क देला. बाकिर एगो बड़ भोजपुरी इलाका जवन बिहार में बा ओहिजा के सरकार के त कबीर कवनो हिंदी-भोजपुरी के महान संत-कवि रहन इहो याद ना आवे. एकरा से आज के राजनीतियो के पता चलेला, जेकरा में हर चीज के मुनाफा के हिसाब से देखल जाला. अउर कबीर एगो अइसन कवि रहन, जवन कि जात-पांत से लेके धर्म तक के खिलाफ रहन. अइसन में जात आ धर्म के खिलाफ खड़ा होखे वाला कबीर के याद कइल त उनके खातिर घातक हो जाई, उनकर भोट बैंक बिदक जाई. एह से साजिशनो कबीर के हाशिया प राखे के कोशिश कइल गइल. एकरा के कबीर के एह दोहा से समझल जा सकेला-
मेरा तेरा मनुआ कैसे इक होइ रे
मैं कहता हूं आंखिन देखी
तू कहता कागद की लेखी,
मैं कहता सुरझावन हारी,
तू राख्यो अरूझाई रे.
खाली एह चंद पंक्ति में आज के राजनेता के चरित्र उजागर हो रहल बा कि कइसे ऊ लोग सब कुछ अझुरा के रखले बा. ऊ ना चाहस कि कवनो समस्या के समाधान होखे अउर इहे बात बा कि कबीर दर्शन के साहित्य में जेतना जगह मिलल, राजनीतिक जगत ओकरा से ओतने दूर रहल. काहे कि कबीर के वाणी हमेशा दुखिया लोगन के पक्ष में रहे. उनकर बिंबो दबल-कुचलल बुनकर, धोबी, बढ़ई, लुहार, गुलाम, महरा आ भिखारी जइसन जमात से आवेले.
ओइसे त कबीर के प्रासंगिकता सर्व-समाज में बा. बाकिर भोजपुरिया लोग कबीर के आपन पहिला कवि मानेले. हालांकि उनका से पहिलहूं भोजपुरी में साहित्य रचल गइल, बाकिर ऊ छिटपुट रहे. नाथसिद्ध साहित्यो में छिटपुट रूप से भोजपुरी मिलेला, बाकिर कबीर साहित्य त पूरा तरह से भोजपुरी से भरल बा. कबीर जनकवि रहलें. दार्शनिक रहन. दबल-कुचलल समाज के आवाज रहलें. ऊ आपन जमाना के तमाम तरह के पोंगापंथ प प्रहार करे से ना चूकलन. बाकिर ऊ पोंगापंथ खाली ओही जमाना के ना रहे, आजुओ चारों ओर लउकेला-
माला फेरत जुग गाया, मिटा ना मन का फेर.
कर का मन का छाडि़, के मन का मनका फेर..
आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी उनका बारे में बड़ नीमन बात कहले बाड़े, ''जवन लोग कबीरदास के हिंदू-मुस्लिम धर्म के सर्व-समन्वयकारी मानेले ऊ का कहेले ठीक से बुझाला ना. कबीर के रास्ता एकदम साफ रहे. ऊ दूनों के रास्ता स्वीकार करे वाला में ना रहन. ऊ मय बाह्यïाचार के जंजाल आ संस्कार के विध्वंस करे वाला क्रांतिकारी रहन. समझौता उनकर रास्ता ना रहे. एतना बड़ जंजाल के ना करे के क्षमता कवनो मामूली आदमी में नइखे हो सकत. कमजोर स्नायु के आदमी एतना भार बरदाश्त नइखे क सकत. जेकरा आपन मिशन प अखंड विश्वास ना होखे, ऊ एतना साहसी नइखे हो सकत.
अइसन कबीर के आज के घोर अराजकता के युग में बहुते महत्व बा. एकरा से इनकार नइखे कइल जा सकत. आज के युग के आडंबर के बतावत उनकर एह पंक्ति के देखीं-
जो नर बकरी खात है, ताको कौन हवाल
पर अब नर ही नर को खात है, बुरा धरती का हाल !
अउर इहे वजह बा कि आज छव सौ बरिस से तमाम आंदोलन के नायक बन के कबीर खड़ा बाडऩ. अरुण कमल के शब्दन में, ''कबीर के कविता हमार आह्वïान करेले कि उठ एकरा बदल. ई खाली संत के वाणी नइखे, कबीर सामूहिक कर्म के आह्वïान करेले. एकर आह्वïान ऊ आपन पंक्ति में कइलहूं बाड़े- 'कहत कबीर सुनो भई साधो.
आज के युग में कबीर के प्रासंगिकता के देखत एह बात के शिद्दत से महसूस कइल जात रहे कि कबीर के विचार के देश आ दुनिया में फइलावल जाव. कबीर के जाने-माने वाला हर लोग के भीतर एह बात के लेके एगो उद्वेलन रहे. भारत में रहे वाला एक करोड़ से जादे कबीरपंथी अउर दुनिया भर में फइलल कबीर के भक्तन के भीतरो एकरा लेके बेचैनी रहे. एकरे मद्देनजर कबीर विचारधारा प आधारित एगो सैटेलाइट टेलीविजन चैनल शुरू होखे जा रहल बा. कबीर पंथ के आगे बढ़ावे वाला वाराणसी के लहरतारा स्थित कबीर मंदिर मूलगढ़ी अब संत कबीर के विचारन के आम आदमी तक पहुंचावे के तैयारी क रहल बा. उनका विचार प आधारित टीवी चैनल लावे जा रहल बा. मूलगढ़ी के प्रमुख आचार्य विवेक दास बतइले, ''हमनी के सेटेलाइट चैनल शुरू करे जा रहल बानी जा. एकरा खातिर दिल्ली के मदनगीर स्थित कबीर भवन में अत्याधुनिक स्टूडियो के निर्माण चल रहल बा, जवन आखिरी दौर में बा.
ऊ कहले, ''हमनी के उद्देश्य संत कबीर के वैश्विक भाइचारा के संदेश के दुनियाभर के लोगन तक पहुंचावल बा. ऊ भरोसा जतइले, ''कबीर के अगिला जयंती तक एह चैनल के ऑन एयर क दीहल जाई. चैनल के नाम अबहीं तय नइखे भइल. ई चैनल पूरा तरह से कबीर दर्शन प आधारित होई.
एतने ना कबीर के विचारधारा के फइलावे खातिर मीडिया के अन्य माध्यमो के सहयोग लीहल लीहल जा रहल बा। अबकी कबीर जयंती के अवसर प उनका प बनल चार गो फिलिम कैलिफोर्निया के स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में कबीर उत्सव के दौरान देखावल जा रहल बा. कबीर के दर्शन प आधारित फिलिम बनावे वाली चलो हमारे देस नाम फिलिम के निर्देशिका शबनम विरमानी आपन फिलिम के माध्यम से दुनिया भर में कबीर के विचार फइला रहल बाड़ी. एगो बातचीत में ऊ कहली, ''हमहीं एगो नइखीं, जवन देश-दुनिया में कबीर के विचारधारा के आगे बढ़ा रहल बानी. हमरा जइसन कई लोग एकरा में लागल बा. सिनेमा एगो माध्यम त बड़ले बा, बाकिर मालवा के दलित समाज के प्रहलाद सिंह टिपनया उत्तर भारत में कबीर के आवाज लोगन तक पहुंचा रहल बाडऩ, ऊ जादे बड़ काम बा. स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफे सर लिंडा हेसो कबीर में लीन बाड़ी.
कबीर के खोज में निकलल फिलिम निर्देशिका विरमानी लिंडा हेसो के एह यात्रा के अहम कड़ी मानेली. उनकर वाराणसी में गुजरल दिन आ स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में आज के काम, दूनों कबीर से जुड़ल बा.
बाकिर कवनो आदमी संगे सबसे बड़ विसंगति ई होला कि ऊ जवन चीज के जिनगी भर विरोध कइलस ओकरे से ओकरा जोड़ दीहल जाव. कबीर जीवन भर धर्म आ जाति के विरोध में खड़ा रहले, ऊ कहले-
पाहन पूजे हरि मिले तो मैं पूजूं पहाड़
ताते वह चाकी भली पीस खस संसार
कांकर पाथर जोरि के मसजिद लेई चुनाय
ता चढि़ मुल्ला बांग दे बहिराहुआ खोदाय
या फेर उनकर एह दोहा के देखीं-
मसजिद भीतर मुल्ला पुकारै,
क्या जाने है तेरा साहब कैसा है ?
चिंऊँटी के पग नेवर बाजे,
सो भी साहब सुनता है
पंडित होय के आसन मारै
लंबी माला जपता है
अन्तर तेरे कपट कतरनी
सो भी साहब लखता है
कबीर जीवन भर धर्म के विरोध कइले, बाकिर उनकर पूजा शुरू हो गइल. उनकर अनुयायी उनका भगवान बना देले. उनकर मंदिर बन गइल. आज हमनी के उनकर साहित्य के भुला के , उनकर पोंगापंथ के खिलाफ आग उगलत शब्दन के उपेक्षा क के उनके भगवान बना देले बानी जा. ओइसहीं एह पंक्ति के देखीं-
पूरब जनम हम ब्राह्मïण होते, वोछे करम तप हींना
रामदेव की सेवा चूका, पकरि जुलाहा कीन्हां
याने ऊ आपन पूरा जीवन जात-पांत के विरोध में लगा देले अउर हमनी के कबीर के साहित्य अउर उनकर दर्शन प बात करे से जादे एह बात के संधान करे में लागल बानी जा कि ऊ जुलाहा रहन कि ना, ऊ मुसलमान रहन कि हिंदू. एकरा से बड़ विसंगति कबीर के साथे अउर कवनो दूसर नइखे हो सकत. कबीर के एह जयंती प उनका सबसे बड़ श्रद्धांजलि इहे होई कि-
माया महाठगिनी के हम जानी
तिरगुन फांस लिए कर डोलै बोलै मधुर वाणी
माया महाठगिनी के मोह से निकल के हमनी के कबीर के एगो कविए-दार्शनिक रहे दी जां, उनका भगवान ना बनाईं जा.
सोमवार, 5 अप्रैल 2010
शुक्रवार, 5 मार्च 2010
विश्व फलक प भोजपुरी पत्रकारिता
द संडे इंडियन के साथे भोजपुरी पत्रकारिता के गौरवपूर्ण सफर के दू साल पूरा हो गइल. एह सुनहरा सफर के मील के पत्थरन प अक्षर-अक्षर नज़र
दुनिया में भोजपुरी भासा के पहिला नियमित राष्ट्रीय समाचार पत्रिका द संडे इंडियन के दू साल पूरा हो गइल. मार्च 2008 में एह पत्रिका के प्रकाशन मैनेजमेंट गुरू प्रो. अरिंदम चौधरी के नेतृत्व वाला प्लानमैन मीडिया समूह के बैनर से भइल त एगो इतिहास रचा गइल. ई द संडे इंडियन के पहिले से निकलत 13 भासा के संस्करण में खाली एगो आउर भासे ना जोड़लस, बलुक दुनिया भर के भोजपुरिया लोगन के उन्हकर भासा में निकले वाला पहिला राष्ट्रीय समाचार पत्रिका बन गइल. अइसे त भोजपुरी पत्रकारिता के पुरान इतिहास रहल बा. बाकिर हाल के दिन में भोजपुरी फिलिमन आ टीवी चैनल के अइला के बाद एह पत्रिका के आवे से सांचहूं में भोजपुरी के स्वर्णिम युग के शुरुआत हो गइल. अब ई पत्रिका भोजपुरी जगत के जानल पहचानल नाम हे गइल बा. भोजपुरी भासा के आंदोलन के प्रखर अगुआ के भूमिको ई निभा रहल बा. पिछला दू साल में एह पत्रिका के कइएक गो संग्रहणीय अंक निकललीस. बाकिर एइजा हमनी के भोजपुरी के आपन पाठक लोग आ शोधार्थी–विद्यार्थी लोगन खाती एह पत्रिका में पिछिला दू साल में छपल सामग्री के सार संक्षेप दे रहल बानी जा. –
- कार्यकारी संपादक, द संडे इंडियन, हिंदी आ भोजपुरी
Best regards,
Onkareshwar Pandey
Executive Editor, The Sunday Indian (Hindi & Bhojpuri)
World's only News Weekly in 14 languages
http://www.thesundayindian.com/26102008/default.asp
Office—0120—4170139 (D) Email - editoronkar@gmail.com
Former Resident Editor--RASHTRIYA SAHARA (Hindi Daliy), Delhi & Patna
Executive President of BROADCASTERS CLUB OF INDIA www.broadcastersclubofindia.org
Executive Director, ASIA Region, Bhojpuri Association of India (BHAI)www.BhojpuriIndia.org
Member, Advisory Committee, Bhojpuri Adhyayan Samiti, BHU, Varanasi
Founder, Global Movement for Bhojpuri
शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2010
महाराष्ट्र, पंजाब, असम आदि राज्यों के बाद अब तमिलनाडु में बिहारी छात्रों पर कहर
महाराष्ट्र, पंजाब, असम आदि राज्यों के बाद
अब तमिलनाडु में बिहारी छात्रों पर कहर
तमिलनाडु के कुड्डालोर स्थित अन्नामलाई विश्वविद्यालय में कल रात पुलिस लाठीचार्ज के बाद से इंजीनियरिंग के दो बिहारी छात्रों के नहर में मृत पाए जाने से परिसर में तनाव पैदा हो गया है। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए विश्वविद्यालय परिसर और अस्पताल में बडी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।झारखंड के एक छात्र की सडक दुर्घटना में मौत के बाद विश्विद्यालय परिसर में हिंसा फैल गई थी। उत्तर भारत के लगभग 300 छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर छात्र के इलाज के लिए उचित सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पाने का आरोप लगाते हुए राजा मुथैया अस्पताल में मरीजों पर हमला कर दिया था।
पुलिस लाठीचार्ज के दौरान भागते समय एक छात्र नहर में गिरकर डूब गया। इसे देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने इंजीनियरिंग की कक्षाओं को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया और छात्रों को छोड देने की मांग की।बाद में दो छात्रों के लापता होने की जानकारी मिली और अग्निशमनकर्मियों की ओर से उन्हें ढूंढने के लिए चलाए गए अभियान के दौरान नहर से दो शव बरामद हुए। मृतकों की पहचान आशीष रंजन कुमार (20) और एम सुब्रत राज (20) के रुप में की गई है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल में भेज दिया गया है और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए विश्वविद्यालय परिसर और अस्पताल में बडी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।
तमिलनाडु के इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाई करने गए बिहार के दो छात्रों की मौत की सूचना के बाद उनके परिजनों को बिहार सरकार ने डेढ़-डेढ़ लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तमिलनाडु में पढ़ाई कर रहे बिहारी छात्रों की सुरक्षा के लिए वहां के मुख्यमंत्री से बात भी की है। मुख्यमंत्री सचिवालय के एक अधिकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री ने तमिलनाडु में पढ़ाई करने गए दो छात्रों की मौत के बाद उनके परिजनों को डेढ़-डेढ़ लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया है। अधिकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री ने वहां के मुख्यमंत्री एम करुणानिधि से बात कर वहां पढ़ाई कर रहे बिहारी छात्रों की सुरक्षा देने को भी कहा है। राज्य के गृह सचिव आमिर सुबहानी ने मंगलवार को पत्रकारों से चर्चा करते हुए बताया कि रविवार को तमिलनाडु के कडलूर जिले के अन्नामलाई विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे दो बिहारी छात्रों की उस समय मौत हो गई थी जब पुलिस और छात्रों के बीच हुए टकराव में मची भगदड़ में कुछ छात्र कॉलेज के नजदीक नहर में डूब गए थे। नहर में डूबने के कारण बिहार के दो छात्रों की मौत हो गई थी। उन्होंने बताया कि वहां के गृह सचिव से बात हुई है तथा शवों को लाने के लिए दोनों छात्रों के अभिभावक पटना से रवाना हो गए हैं। उन्होंने अधिकारियों की टीम भेजे जाने की बात पर कहा कि वहां के छात्रों को सुरक्षा दिलवाना मुख्य कार्य है अगर जरूरत पड़ी तो अधिकारियों को भी भेजा जाएगा।
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(एकरा पहिले चेन्नई के वेल्स यूनिवर्सिटी में पढ़ रहल बिहार, झारखंड आ यूपी के उत्तर भारतीय छात्रन के छात्रावास में बंद क के स्थानीय छात्र दू दिन तक लगातार लाठी डंडा से पिटाई करे के समाचार आ चुकल बा. एहिजा मैनेजमेंट आ इंजीनियरिंग के छात्रन के बीच क्रिकेट मैच के लेके भइल विवाद के बाद छात्रन के पिटाई शुरू भइल रहे. बिहार के गृह सचिव आमिर सुबहानी एह मामला प तमिलनाडु के गृह सचिव से बात क के छात्रन के सुरक्षा के अपील कइले रहन.
पिछला सितंबर महीना में तमिल मजदूर बिहार के मजदूरन पर कहर बरपइले रहल स. एकरा में बिहार के तकरीबन दस मेहनतकश घायल हो गइल रहन. एकरा से बिहार के वैशाली जिला के गोरौल थानान्तर्गत छितरौली के मूल निवासी 45 कामगार दहशत में रहन. तब युवा जनता दल के वैशाली जिलाध्यक्ष एह प्रकरण में हस्तक्षेप खाती मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के चिट्ठी लिखले रहन.)
BHOJPURIA WORLD: GLOBAL BHOJPURI MOVEMENT
मंगलवार, 9 फ़रवरी 2010
GLOBAL BHOJPURI MOVEMENT
Mahatma Gandhi had started his Satyagrah Movement from Bhojpuri area West Champaran. The first President of India Dr. Rajendra Prasad was a Bhojpuri speaking person. The present Loksabha speaker of India Mrs. Meira Kumar is a known Bhojpuria woman. Bhojpuri speaking leaders have become Presidents, Prime Ministers not only in India, but in some other countries as well. Bhojpuri produces 8 out of 10 Top Hindi writers. It has its Language, Literature, Script, Art, Culture, Music, Film and all other things which are necessary to get the recognition for any language. Then why this should not be recognized in India and in other countries where it has a sizeable population?
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Onkareshwar Pandey
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